Monday, October 22, 2018

बेवफा तुझे कैसे कहूं ?

और     कितना  ढूंढोगे  तुम  हमें  बेवजह , बेपनाह
मिल  नहीं  पाओगे , ढूंढ  नहीं  पाओगे  तुम  हमें
अगर  मिलना   हि  है  तो  ज़रा  ख्यालों   में  खोज
या  तन्हाई  में  डुबकी  मार
शायद  मुलाकात   होंगी  तुझे  हमसे
पर  मिलना  तो  हम  तुझसे  रोज़  चाहते  हैं
और  दौड़ -दौड़कर  चले  आते  है  तेरेपास
तेरे  पलकों   के  छाव में  रहने  के  उम्मीद लेते  हुए
पर  क्या  करूँ  तू  तो   तब  सोया  रहते  है , सपनो  में  खोया  रहते है
लौटता  हूँ  में  तब  उदासी  हुयी
पर  सोचता  हूँ  कि  शायद  कल  तुम  मेरे  लिए  जागे रहेंगे
फिर  से  दौड़  आता  हूँ  और  लौट  जाता  हूँ
इतनी  हि थी  क्या  हमारे   प्यार ,  कि  एक  रात   के  नींद  भी  तू  खो  नहीं सकते ?
आज  हम  फिर  आउंगी  तेरे   पास … जागे   रहना  मेरे  लिए
एक  बार ….सिर्फ  और  सिर्फ  एक  हि  बार …..
क्या  पता  कि  यह  हमारे   आखरी  मुलाकात   हो ……….

No comments:

Post a Comment